Transcriptions

01. Adding anyone, anything in Life, poisons Life(English)

The most important thing to understand in Spiritual Life is, "What is LIFE? What exactly is LIFE?" We have to understand that Me, the Soul, just has Life. I, the Soul; Me, the Soul, I just have life and nothing else!! And that Life is not any form of Life which I imagine. Life is just "Pure Simple Life". What does it mean? It meansYou just exist! This is Life....

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02. Love 1(Hindi)

हम सब stress में रहते हैं individually, family wise, socially , हर प्रकार से stress में रहते हैं | और जब भी कोई बीमारी होती है उसके पीछे कोई ना कोई कारण ज़रूर होता है cause and effect | तो क्या कारण है की stress इतना ज़्यादा बड़ चुका है? क्या कारण है??

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03. Iccha Purti Anand Purti Nahi Hai(Hindi)

' मनुष्य ' एक अद्वितीय स्तिथि है | इस शब्द पर गंभीर मनन व चिंतन की आवश्यकता है | 'मनुष्य' एक स्तिथि है, अद्वितीय स्तिथि, 'मनुष्य' |हम मनुष्य नही हैं, हम एक अद्वितीय स्तिथि में हैं |  मनुष्य से नीचे होते हैं पशु इत्यादि | इन्होनें जैसे होना होता है, वैसे ही होते हैं |

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04. POS-1(Hindi)

भगवान Perfect हैं,Complete हैं,जो ज्ञान दे रहे हैं वह भी पूरा Complete है, Perfect है | Perfect ज्ञान देने के बाद भगवान क्या कह रहे हैं? मैंने Perfect ज्ञान दिया है, इसके बाद भी तुम इस पर पूर्ण मनन करो,और अच्छी तरह सोचो जो मैंने बोला है और उसके बाद भी तुम्हारी जो इच्छा हो वो करो |

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05. Adoshdarshi(Hindi)

भगवान हर चीज़ की Supreme positivity की last limit हैं| Positive to the power of infinity ....that is GOD. भगवान के भक्तों में गुण होते हैं वही हमें स्वयं के जीवन में अंगीकार करने हैं, तभी हम खुश रह पाएँगें| अच्छा व्यक्ति अच्छा किस लिए कहलाता है? अपने गुणों की वजह से | भक्त 'भक्त' क्यूँ कहलाता है? अपने गुणों की वजह से | यह नहीं कि कंठी डाली और कोई भी आचरण करें तो हम भक्त होंगें |

 

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06. Ati Sneh Purvak Acharan(Hindi)

जो आश्रय लेकर भजन करता है, उसका कृष्णा कभी त्याग नहीं करते| जो गुरु का वास्तविक आश्रय लेकर भजन करता है, उसका कृष्णा कभी त्याग नहीं करते| यह नहीं कहा जा रहा -" जो दीक्षा लेकर भजन करता है"|  जो आश्रय लेकर भजन करता है| आश्रय किस चीज़ का ? गुरु की कृपा का आश्रय लेकर जो भजन करता है, उसका कृष्णा कभी परित्याग नहीं करते|

 

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07. Karm Prarabdh(Hindi)

भारतवर्ष में जिन का जन्म होता है,वे अधिकांश इन शब्दों का प्रयोग करते हैं-आत्मा , कर्म इत्यादि| और कर्म इसके बारे में हम बचपन से सुनते आ रहे हैं , बोलते आ रहे हैं| पर जिस प्रकार हमें "आत्मा" के गहरे रहस्य पता चले थे , शायद आज इस  शब्द "कर्म" के ग़ूढ रहस्य समझ आएँगे |

 

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08. Seva Tattva(Hindi)

यह सृष्टि जो हमें  दिख रही है- इसकी एक दिन रचना होती है, कुछ दिन तक यह रहती है, इसका संहार हो जाता है,यह ख़तम हो जाती है,यह लुप्त हो जाती है,यह रहती नहीं है| परन्तु आप रहते हैं ...आप कौन? आप divine हैं| You are divine, what you aspire for is also divine. What you aspire for is? "आनंद", Happiness!! So, what you aspire in reality is Divinity!!!

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09. Meri Svamini(Hindi)

मेरी स्वामिनी,मेरी स्वामिनी, इसके इलावा गौड़िया वैष्णवों के हृदय में कुछ नहीं चलता| यदि चलता है तो वही आनंद में बाधा है| मेरी स्वामिनी,मेरी स्वामिनी, हमरी नहीं, मेरी, सिर्फ़ मेरी,मेरी स्वामिनी| मेरी स्वामिनी की महिमा कैसी है?

 

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10. Love Loving Relationship(Hindi)

जगत में इतनी चहल-पहल है | निश्चित ही कुछ प्रयोजन है, कुछ प्राप्ति करना चाहते हैं, तभी इतनी चहल-पहल है | प्राप्ति भी हो जाती है, अच्छा घर प्राप्त हो जाता है, अच्छा शरीर प्राप्त हो जाता है, भोजन प्राप्त हो जाता है अच्छा, अच्छे कपड़े, अच्छी गाड़ी,  बच्चे अच्छे, business सब अच्छा, सब प्राप्त हो जाता है लेकिन फिर भी ऐसा है जो कुछ प्राप्त नही होता | सब कुछ होते हुए भी कुछ ऐसा है जो नही होता है, कुछ-कुछ रिक्तता, incompleteness रहती है, कुछ missing रहता है सब होने के बाद भी | ऐसा क्या है ? सब कुछ है पर कुछ-कुछ ऐसा है जो नही है |

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11. Krsna Tattva 1(Hindi)

श्री कृष्णा आनंदमय हैं, प्रेममय हैं, सौंदर्यमय हैं व माधुर्यमय हैं | इन आनंदमय, प्रेममय, सौंदर्यमय, माधुर्यमय भगवान की जो उपासना है, इस उपासना का जो भाव है, यह भाव अगर हृदय में प्रतिष्टित हो जाता है, तो जीव की जो आनंद की धारा है वो अटूट हो जाती है और सदा-सदा के लिए जीव धन्य हो जाता है |

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12. Radharani Rupamrita (Hindi)

प्रबोधानंद सरस्वती कहते हैं- हरि के सभी रूप आंन्दमय हैं, हरि के सभी आनंद भी, सभी धाम भी आंन्दमय हैं, और हरि की जो कांतायें हैं- लक्ष्मी इत्यादि वो भी आनंदमय हैं...लेकिन, मेरा मन तो केवल उन ठाकुर के पीछे जाता है, जो केवल..., किसी भी वैकुंठ धाम में नही होता | क्या? कि वे ठाकुरानी के पीछे भागते हैं |

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13. Suffering means fantasy (Hindi)

"As long as you associate any reason for your suffering you are running in the wrong direction." जब आप दुखी होने का कोई कारण ढूँढ रहे हो बाहर, कोई कारण बना रहे हो, तो आप गलत जा रहे हो |

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14. Ati Sneh(English)

Spiritual Master’s service is a very life of a true real disciple. Spiritual Master’s service is the only means of happiness. Even amongst devotees, there are some who do smaraëa, kértana, get initiated, try to do bhajana but don’t get full benefit. Reason being....

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15. New Year 2011(Hindi)

देखा क्या जाता है अधिकांश, कि अभक्तों का जो नया वर्ष मनाना होता है उससे कुछ फरक नहीं पड़ता अगला वर्ष भी पूर्व की भाँति वैसा ही रहता है | जप भी करते हैं, अध्यन भी करते हैं, सेवा भी करते हैं, परन्तु सुखमय क्यूँ नहीं रहता?

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16. Gurudevaya Svaha (Hindi)

"गुरु देवाय स्वाहा", इसका मतलब क्या है? "मैं सर्वस्व को गुरु देव की सेवा में नियुक्त करता हूँ"|

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17. Vatavaran (Hindi)

हमें शरीर, मन, व वाणी से कोई भी ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए जिससे वायु मंडल दूषित हो | और हमें  ऐसे किसी प्रकार के वायु मंडल में नहीं रहना चहिए जिससे शरीर, मन, व वाणी दूषित हो | मनुष्य जो भी संकल्प करता है मन में, जो भी वाणी के द्वारा वचन बोलता है, जो भी शरीर के द्वारा कार्य करता है, उसका वायु मंडल पर  प्रभाव होता है, effect होता है |

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18. Pratah Leela (Hindi)

राधारानी का आपने शृंगार किया, उनको शीशा दिखाया, मणिमय शीशा | किसने? varun तो प्रवेश नहीं कर सकता न वहाँ, मंजरी स्वरूप में | हमने उनको शीशा दिखाया | आहा ! राधारानी शीशे में स्वयं को देखकर अति मोहित हो गयी, यह देखकर नही कि मैं कितनी सुंदर... हम शीशे में देखते हैं तो किसलिए देखते हैं? 

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19. Bhuta Shuddhi (Hindi)

तो आज हमने सोचा की वो चीज़ बतायें जो 'अर्चन' संबंधित है और जो हमारे जीवन में अति-अति-अति अवशयक है | अति अवशयक | इसके बिना भक्ति शुरू भी नहीं होती है |

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20. Adbhut Vyakhya (Hindi)

क्या आज आपने गौड़िया वैष्णव की तरह जन्माष्टमी बनाई? यह समझने से पहले यह समझना होगा कि गौड़िया वैष्णव कौन हैं? गौड़िया वैष्णव मतलब "श्री गौरांग महाप्रभु के अनुयायी" | गौरांग महाप्रभु के अनुयायी 'गौड़िया वैष्णव' का एक ही मतलब है कि वे वो साधना करते हैं जिस में दो स्वरूप होते हैं |

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21. Seva Tattva (English)

You are totally different from the things you see around you. You are Divine…, you are divine and what you aspire for is also divine. What you aspire for? It is just happiness. So what you aspire, in reality, is divinity. You are divine, what you aspire for is divine. Happiness is not material, it is divine. Lord is divine....

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22. Habits (Hindi)

Habit means, "something of past is remaining, some dead past is remaining", that is habit. You forget soul, you forget maïjaré, you forget everything. You just connect yourself to some dead past, dead…, dead patterns.

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23. Nityananda Tattva (Hindi)

महाप्रभु तो छंद हैं ही हैं, नित्यानंद प्रभु उनसे भी ज़्यादा छंद हैं | उन्हें और भी कम लोग जानते हैं | परंतु कृपा की अगर कोई आख़िरी सीमा है, तो वो क्या है? नित्यानंद प्रभु | कृपा की अंतिम परिणति को नित्यानंद प्रभु कहते हैं |

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24. Touching Krsna (Hindi)

" Are you touching Krishna...?" " Are you touching Krishna...?" This is the question which needs to be asked, if you are not happy! यदि आप खुश नहीं हैं.....कब-कब? हफ़्ते में सात दिन, एक दिन में चौबीस घंटे और हर घंटे में साठ मिनिट और हर मिनिट में साठ सेकेंड, यदि हम खुश नहीं हैं, तो यह प्रशन हम को अपने आप से करना है, " Am i touching Krishna?"

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25. Bhakti means absorption (Hindi)

"Bhakti means absorption", absorption किस में? तो किस चीज़ में absorption? "मंजरी भाव में absorption | Absorption रोज़ पूरा जीवन | अब अपना मंजरी भाव जागृत करने की क्या विधि है?

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26. A-Zee of Bhakti (Hindi)

"A-Zee of Bhakti", "A-Z नहीं, A-Z तो गोपी भाव तक होता है",  "A-Zee of Bhakti- "मंजरी" भाव पर्यन्त" | तो जैसे की हम जानते हैं कि जीव के जब अध्यात्मिक पुण्य का संशय होता है, तो उसके उपर भगवद् कृपा विशेष होती है |

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27. Gaur Tattva-2 (Hindi)

श्रील प्रबोधानंद सरस्वती इत्यादि महान आचार्यागण बताते हैं कि जो भी व्यक्ति इस जन्म मृत्यु के जंजाल से निकलने की चेष्टा भी करता है, वह व्यक्ति अत्यंत भाग्यशाली है | फिर वे बताते हैं कि, उससे भी भाग्यशाली व्यक्ति वह है जो भगवान नारायण की, वैकुंठपति नारायण की भक्ति में लीन होता है |

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28. Radha Tattva-1 (English)

So, all of us need to know, understand Rädhäräné in true sense, if we really want to celebrate Rädhäñöamé… We must know who Rädhä really is and why I am celebrating Rädhäñöamé. If we want to celebrate Rädhäñöamé, we must know who is Çré Kåñëa, who is Çrématé Rädhäräné, who are The Gopés, The Vraja beauties.

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29. Mitti-1 (English)

As it is well known that even the most foolish people, they don't perform anything without a goal; so, even the most foolish people have some goal, some motto behind each of their activities. If a foolish person has some goal; surely an intelligent person must also have some goal behind each and every activity.

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30. Particle Of Service-I (English)

Bhagavad Gétä is called The ABCD of Spiritual Life. It is ABCD of Kåñëa consciousness. Kåñëa, as understood from the Çästras, is Himself, The condensed form of Änanda, Rasa. Kåñëa, The Lord Himself is Bliss, He is Happiness. So Bhagavad Gétä is The ABCD of änandamaya consciousness, blissful consciousness. Bhagavad Gétä means the life style by which one can always remain happy, and that too for eternity. Anyone who wants to be happy needs to be thorough with Gétä, for it is the base. And if one doesn‟t have clarity even on this, that person can never be happy. To be happy, a living entity desperately needs to have Bhagavad Gétä in his genes, so to say.

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31. Bhuta Suddhi (English)

You all are welcome in today's program. Today is the first anniversary of our Öhakürajé. When this type of a program happens…, anniversaries…, we narrate the different types of pastimes of The Lord; then, we are able to appreciate to some extent but later we forget; so, today I thought to share about arcana, Deity worship, which plays a very-very important role in our lives. Bodily identification doesn't go without arcana......

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32. Constant Guidance (English)

To be really happy ~ we just have to do one thing: just observe the psycho-drama, which we are doing, that‟s all....just observe the psycho- drama, we are doing, that‟s all; what we are doing to ourselves.

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33. Nityananda Tattva (English)

On this very auspicious Occasion of Nityänanda Trayodaçé, all you, “would-be”, maïjarés are heartily welcomed… Mahäprabhu is called, “chand avatära”, the hidden incarnation. Nityänanda Prabhu is even more, “chand”, more hidden than Mahäprabhu. That is why relatively lesser persons are acquainted with Him. So, if there is any last limit of Mercy, what is that?

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34. Love-8 (Hindi)

90% से ऊपर भक्त जो भक्ति करते हैं, वे सुकृति प्राप्त होती है उससे, उस प्रकार की भक्ति से | परन्तु अगर हम ऐसी भक्ति करना चाहते हैं, जिससे आनंद प्राप्त हो, that bliss, that happiness, that ecstasy, enters our veins, enters our atoms, every molecule of our body...तो आज का सत्र उन भकतों के लिए है |

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35. Navdeep pothe pothe (Hindi)

हम गौर-गौर कर रहे हैं, कैसे गौर? गौर साथ हम भी तो हैं न | गौर सपार्षद हैं ना? 

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36. Rasraj Mahabhava Gauranga (Hindi)

नवद्वीप धाम में हम आए हैं, तो उसका purpose क्या है? We should carry Gaura back home, जहाँ हम जा रहे हैं, गौर को अपने स्थान पर वापिस लेकर जायें |

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37. Nitye Lila Vayapak (Hindi)

नित्य लीला है यह इतना विस्तृत..., इतना व्यापक subject matter है- कि निश्चित रूप से बोलने में केवल एक ही चीज़  होती है, ऐसा होता नहीं है जबकि भगवान के अनेक प्रकाश में नित्य लीला निरंतर..., अनेक प्रकाश में, many-many प्रकाश में, नित्य लीला निरंतर चलती रहती है |

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38. Particle of Service – 3 (English)

We are not object of service! We are particle of service! Object of service means that people should serve me, this is what we want! Everyone should serve me, everyone should praise me. Everyone should say good things about me, I am so nice! Wife, children, people at home, relatives, friends, everyone should serve me…

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39. Particle of Service – 2 (English)

Sometimes we think, “Sväméjé, what you are saying is right but You know, practical life is different.” Oh, this is not true because life is one..., one individual

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40. Nimitta Matra (English)

Me, the Soul which is beyond eighty-four (84) lacs species, want something eternally, which is beyond 84 lacs species. I am beyond 84 lacs species and what I want desperately, is beyond the activities of 84 lacs species. Till the time, the soul feels connection with The Lord, ätmä~soul continues to suffer. The Lord is love personified...Guru is also prema rüpäe dhémahé; until the soul experiences connection with Guru...with The Lord, till then the soul remains sad though naturally blissful, in connection to Guru and Gauräìga.

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41. Manjari 1 (Part-3) (English)

Like, take for example, one’s Guru is situated in Maïjaré Bhäva and if they take initiation from Them, if They consider us qualified, so what They do? Here The Dékñä Guru is there…, and in The Spiritual World, Goloka, there is one ‘Samañöi Guru’. Samañöi Guru, understand this thing…, you heard this word for the very first time, Samañöi Guru. Samañöi Guru, is the form of The Lord only, a Prakäça of Lord Kåñëa…, who always remains to Kåñëa’s left side in Goloka. When The Dékñä Guru initiates a Disciple, He has…, by a very special connection with Samañöi Guru, He gives a Siddha Deha, Siddha Svarüpa, Eternal Svarüpa, Maïjaré Svarüpa for that Sädhaka in which he can serve The Lord eternally. The Samañöi Guru directs which form of the Niñkriya form of the Maïjaré…, in Goloka, is the Eternal Siddha Svarüpa of the Sädhaka in which he can worship Çré Yugala.

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42. Manjari 1 (Part-2) (English)

When does The Lord appear most attractive, most beautiful? Nikuïja Kåñëa, Rädhä-Kåñëa...!! And if we do Darçana and render service of that Kåñëa, then we can relish the highest happiness! The HIGHEST…, the relishment in Maïjaré Bhäva, actually dances over and above all other relishments…, all other relishments…!! It is the pinnacle…, Highest, The Topmost Happiness! ‘Pinnacle of Happiness...’ This happiness cannot even be attained by Kåñëa..., and Lord has come, Kåñëa HIMSELF has come…, as Gauräìga, to give us that relishment, that Happiness…!! Can you imagine...? Can you even imagine…? For what Lord has Descended to bestow...?

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43. Manjari 1 (Part-1) (English)

Hare Kåñëa! Today is a very Auspicious Day! Today, we are celebrating The Appearance Day of- “Çré Çré Rädhä Räs Bihäré Jé”… Today is also The Appearance Day of- “Mä Jähnavä”..., Jähnavä Mätä! Are you all acquainted with Jähnavä Mätä…? Do you all know Jähnavä Mätä...? What is the significance of Jähnavä Mätä in our lives...? And what is the relationship between Çré Çré Rädhä Kåñëa and Jähnavä Mätä, today we will all try to understand all this…!

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44. Krsna Tattva 1 (English)

Today is the appearance day of Sarvalokamaheçvara...., Sarveçvar-eçvara....,Sarvätéta Sarvamaye....Acintya....Anaìta....Viruddha-guëadharmäçraya.... Akhila-rasämåta-sindhu....,Nandanandana...., Rädhänätha...Çré Kåñëa!!!

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45. Ista Nistha (English)

An intelligent sädhaka, his each and every activity, is solely for the pleasure of his Éñöa; not even for the pleasure of any other Viñëu Tattva....not for anyone else pleasure. Sädhaka performs all activities, twenty four into seven (24x7), solely for the pleasure of their Worshipable Deity.....their Éñöa-Deva. So when we do çravaëa, it should be clear, whether my Éñöa...Éñöa-Deva is being pleased by that, whether my Éñöa-Deva is being served by my çravana. It’s not that, sometimes we think that Lord Räma is my Éñöa....sometimes Kåñëa is my Éñöa or Nåsiàhadeva is my Éñöa; No, it should not be that way.

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46. Humanistic Inkling – Part II (English)

From the previous session, everyone must have understood that – Humanistic approach to life should not be my approach to life; My approach to life should be my approach to life ! That means soul’s approach to life... Soul’s approach to blissful living ! No interference for any human thoughts, emotions, dealings, actions.

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47. Gaur Tattva 2 (English)

Right now, you all are sitting here in Navadvépa Dhäma, the land of the pastimes of Çré Gaura-Sundara. From this, one can comprehend that you have been blessed with the special mercy of Lord Gauräìga and you have started your journey on the path, shown by Çré Gaura-Sundara.

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48. A to Zee of Bhakti (English)

Although today’s session is unplanned, but it can be a very historical session, as it will be taken from an altogether different perspective.

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49. Witness (English)

All of us are at peace in our constitutional position, in our natural position. We are all at peace. All of us are souls, in our natural position. Give an example, an ocean is calm and suddenly the waves start appearing on it.

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50. No Problem (English)

A devotee is always happy. VAIÑËAVA is ALWAYS HAPPY. We should understand this Principle for eternity. A devotee has no problem. Sometimes, vaiñëavas talk like this, that they have a problem. But if we understand this according to Principle’s point of view, this principle for eternity is- ‘a vaiñëava has no problem’, ‘a Devotee is always happy’.

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51. Let Be (English)

In this journey of our life, these two words will help us a lot... For changing, converting our life, these two words have infinite power. Whatever work we are doing, we should remember that I am on a journey, you are on a journey, everyone is on their own individual journey.

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52. Ataeva Gopi Bhava II (English)

welcome to the second session. The main thing is, “Ataeva gopé-bhäva kori aìgékär”. We have to adopt, we have to imbibe this bhäva in our life, the Maïjaré Bhäva in our life…, “kori aìgékär”. To the degree we are attracted towards this Bhäva and perform service in this Bhäva, to that degree we will advance

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53. Ataeva Gopi Bhava I (English)

“Ataeva gopé-bhäva kori aìgékär” - This is the essence of essence of everything. “Ataeva”- for this reason, “gopé-bhäva kori aìgékär”- adopt the mood of the vraja gopés. After adopting the mood of the vraja gopés, what to do then? Day and night meditate on,“rätri-dine” meditate, on conjugal pastimes of Rädhä- Kåñëa. Be in Gopé Bhäva, Maïjaré Bhäva, meditate on the conjugal pastimes of Rädhä-Kåñëa. How to meditate?

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54. Asvadana Tattva (English)

Çréla Rüpa Gosvämé addressed Mahäprabhu as “mahä-vadänyäya.” Kaviräja Gosvämé addresses Him as “Parama Karuëämaya”. We have to go DEEP into this topic. From this, we will attain strength in our sädhanä, in our bhakti, when we will understand clearly of what actually we can attain.

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